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कुपोषण: कारण और निवारण

कुपोषण: कारण और निवारण

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कुपोषण: कारण और निवारण

भारत में “कुपोषण सप्ताह “ कार्यक्रम पूरे देश में प्रतिवर्ष १ से ७ सितंबर तक मनाया जाता है ।पोषण सप्ताह मनाने का मुख्य उद्देश्य बेहतर स्वास्थ्य के लिए पोषण के महत्व पर जागरूकता बढ़ाना है , जिसका विकास, उत्पादकता, आर्थिक विकास और अंततः राष्ट्रीय विकास पर पड़ता है ।
कुपोषण के कारण:-
कुपोषण एक विश्वव्यापी समस्या है ।पर्यावरणीय, आर्थिक और चिकित्सा स्थितियों की वजह से हो सकती है।
कुपोषण के सामान्य कारणों में शामिल हैं –
खाद्य असुरक्षा या पर्याप्त और सस्ते भोजन की कमी – कई अध्ययन में विकासशील और विकसित दोनों देशों में खाद्य असुरक्षा और कुपोषण में संबंध पाया है।
पोषक तत्वों के अवशोषण के साथ पाचन संबंधी समस्याएं – ऐसी बीमारियां जो कुपोषण का कारण बनती हैं, जैसे कि क्रोहन रोग, सीलिएक रोग और आंतों में बैक्टीरियल अतिवृद्धि।
बहुत ज्यादा शराब पीना – शराब ज्यादा पीने से प्रोटीन, कैलोरी और सूक्ष्म पोषक तत्वों की अपर्याप्त खपत होती है।
मानसिक स्वास्थ्य विकार – अवसाद और अन्य मानसिक रोग कुपोषण के खतरे को बढ़ा सकती हैं। एक अध्ययन में पाया गया है कि स्वस्थ व्यक्तियों की तुलना में अवसाद से पीड़ित लोगों में कुपोषण की व्यापकता 4% अधिक थी।
खाद्य पदार्थों की उपलब्धता या पकाने में कमी – अध्ययन से पता चला है कि बहुत कमज़ोर होने, चल-फिर पाने में दिक्कत और मांसपेशियों में कमजोरी कुपोषण के जोखिम को बढ़ाते हैं। इन समस्याओं से भोजन पकने की क्षमता कम होती है।
गरीबी सबसे वंचित आबादी के लिए पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर भोजन की उपलब्धता को प्रभावित करती है।
पीने के लिए साफ़ पानी की कमी, अस्वच्छता आदि गंभीर कुपोषण के लिए जिम्मेदार जल जनित रोगों की चपेट में आने की संभावना बढ़ जाती है।
कुपोषित लड़कियां अपनी किशोरावस्था में शादी कर लेती हैं ,और उनके बच्चे होते हैं जो अंततः चक्र के जारी रहने से कुपोषित हो जाते हैं।
पिछले कुछ दशकों में भारत में खाद्य खपत में बदलाव आया है, जिसके परिणामस्वरूप बाजरा जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ गायब हो गए हैं।
कृषि क्षेत्र स्टेपल के उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित है, जिसके परिणामस्वरूप पारंपरिक फसलों का उत्पादन और खपत कम होती है, जिससे खाद्य और पोषण सुरक्षा प्रभावित होती है।
कुपोषण के आम लक्षण और संकेत:-
शरीर से असामन्य रूप से फैट कम होना,सांस लेने से सम्बंधित परेशानियां,अवसाद,सर्जरी के बाद जटिलताओं का जोखिम,
हाइपोथर्मिया का जोखिम,असामान्य रूप से शरीर का तापमान कम होना,ठंड ज़्यादा लगना,चोट, संक्रमण या अन्य बीमारी ठीक होने में ज्यादा समय लगना,सेक्स ड्राइव में कमी,प्रजनन क्षमता में कमी,थकान या उदासीनता,
चिड़चिड़ापन।
कुपोषण की रोकथाम के लिए स्वस्थ संतुलित आहार की सलाह दी जाती है। चार प्रमुख खाद्य समूह हैं जिनमें शामिल हैं –
ब्रेड, चावल, आलू और अन्य स्टार्चयुक्त खाद्य पदार्थ। यह आहार का सबसे बड़ा हिस्सा है। और ऊर्जा और कार्बोहाइड्रेट के लिए कैलोरी प्रदान करते हैं। जो कि शुगर में परिवर्तित होते हैं। जिससे ऊर्जा मिलती है।
दूध और डेयरी खाद्य पदार्थ ( वसा और वास्तविक शुगर के महत्वपूर्ण स्रोत होते हैं। जैसे कि – लैक्टोस और कैल्शियम जैसे खनिज)
फलों और सब्जियां ( विटामिन और खनिजों के महत्वपूर्ण स्रोतों के साथ ही बेहतर पाचन स्वास्थ्य के लिए फाइबर और स्थूलखाद्य)
मांस, मछली,अंडे, सेम और प्रोटीन के अन्य गैर-डेयरी स्रोत – शरीर को बनाने में इनका बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। और यह कई शारीरिक और एंजाइम कार्यों में सहायता करते हैं।
इसके अलावा सभी अस्पताल में मरीजों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों को कुपोषण के लिए मूल्यांकन किया जाना चाहिए।बच्चों में कुपोषण की रोकथाम करने के लिए गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त पोषण देना चाहिए।
कुपोषण का उपचार अंतर्निहित कारण और व्यक्ति कितना कुपोषित है, इस पर निर्भर करता है।
आपको घर पर रह कर स्वयं का ध्यान रखने के लिए उचित सलाह दी जा सकती है, या ज़रूरत होने पर आहार विशेषज्ञ (डाइटिशियन) के सपोर्ट की आवश्यकता हो सकती है। गंभीर मामलों में अस्पताल में उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
आहार विशेषज्ञ आपको उन डाइट सम्बंधित परिवर्तनों के बारे में सलाह देंगे जिनसे आपको लाभ होगा। वे आपके लिए एक डाइट प्लान बना सकते हैं जिससे आपको पर्याप्त पोषक तत्व मिलें।
यदि ये उपाय पर्याप्त न हों, तो पूरक (सप्लीमेंट्स) के रूप में अतिरिक्त पोषक तत्व लेने की सलाह भी दी जा सकती है। इन्हें केवल एक मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह पर ही लिया जाना चाहिए।
बच्चों में कुपोषण का उपचार:-
किसी भी अन्य आयु वर्ग के मुकाबले कुपोषण से बच्चों में और अधिक समस्याएं पैदा होती हैं। क्योंकि वे विकास (दोनों शारीरिक और मानसिक) मंदता और फ़िर से होने वाले संक्रमणों की संवेदनशीलता का कारण बन सकते हैं।
लंबे समय तक बीमारियों वाले बच्चों को कुपोषण के लिए एक चिकित्सीय उपाय के रूप में उपचार की आवश्यकता होती है। इसमें अतिरिक्त पोषक तत्व, विटामिन और खनिज पूरक आदि शामिल हैं। अंतर्निहित बीमारी को कुपोषण को रोकने के लिए पर्याप्त रूप से इलाज की आवश्यकता होती है।
अस्पताल में गंभीर कुपोषण के इलाज की आवश्यकता होती है। इसमें पैरेन्टेरल पोषण और पोषक तत्त्व को धीरे-धीरे मौखिक रूप से लेना शामिल है। जैसे ही स्थिति स्थिर हो जाती है। तो वे एक सामान्य आहार को अपनी जीवन शैली में शामिल कर सकतें हैं।
-डॉ दक्षा जोशी
अहमदाबाद
गुजरात ।